Unit 13 · व्याकरण · 10 min read
नेपाली कथ्य र लेख्य वर्ण; उच्चार्य व्यञ्जन
What the syllabus asks for 7
- कथ्य वर्ण र लेख्य वर्ण
- स्वरवर्णको वर्गीकरण
- व्यञ्जनको उच्चारण स्थान
- प्रयत्न
- घोषत्व
- प्राणत्व
- पूर्ण वर्गीकरण तालिका
भाषाको सबैभन्दा सानो एकाइ वर्ण हो। मुखबाट निस्कने आवाजलाई कथ्य वर्ण (ध्वनि) भनिन्छ र त्यसलाई कागजमा उतार्ने चिह्नलाई लेख्य वर्ण (अक्षर) भनिन्छ। नेपालीमा यी दुई सधैँ मिल्दैनन् — हामी लेख्छौँ शिक्षा, बोल्छौँ सिक्छा। कक्षा ११ को परीक्षामा वर्ण पहिचानबाट ३ अङ्क आउँछ। प्रश्न प्रायः यस्तै हुन्छ: "दिइएको वर्णको उच्चारण स्थान, प्रयत्न, घोषत्व र प्राणत्व लेख्नुहोस्।" यो चार-लाइनको उत्तर पूरै सिक्न सकिन्छ, त्यसैले यहाँ अङ्क गुमाउनु हुँदैन।
कुनै पनि व्यञ्जनको परिचय दिँदा यी चारै कुरा क्रमैसँग लेख्नुहोस् — (१) उच्चारण स्थान, (२) प्रयत्न, (३) घोषत्व, (४) प्राणत्व। जस्तै घ = कण्ठ्य, स्पर्श, सघोष, महाप्राण। चारै भनेपछि पूरा अङ्क।
13.1 कथ्य वर्ण र लेख्य वर्ण
कथ्य वर्ण भनेको बोल्दा वास्तवमा निस्कने ध्वनि हो। लेख्य वर्ण भनेको त्यो ध्वनि जनाउन प्रयोग गरिने देवनागरी अक्षर हो।
| आधार | कथ्य वर्ण | लेख्य वर्ण |
|---|---|---|
| स्वरूप | ध्वनि, सुनिन्छ | चिह्न, देखिन्छ |
| स्वरवर्ण | ६ (अ, आ, इ, उ, ए, ओ) | ११ (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ) |
| व्यञ्जनवर्ण | २९ | ३३ |
| उदाहरण | सिक्छा भनी बोलिन्छ | शिक्षा भनी लेखिन्छ |
लेख्य वर्ण बढी हुनुको कारण सजिलो छ — संस्कृतबाट आएका केही अक्षर नेपालीमा छुट्टै ध्वनिका रूपमा बाँचेनन्।
- ई र इ को उच्चारण नेपालीमा एउटै हो — दिन र दीन बोल्दा फरक पर्दैन।
- ऊ र उ पनि उस्तै — सुर र सूर।
- ऋ लाई हामी रि भनेर पढ्छौँ — ऋतु = रितु।
- ऐ र औ एउटै ध्वनि होइनन्, संयुक्त स्वर (अ + इ, अ + उ) हुन्।
- श, ष, स तीनै अक्षर बोल्दा स सुनिन्छ — काठमाडौँको बोलीमा शहर, षड्यन्त्र, सहर सबैको पहिलो ध्वनि उही।
- ञ र ण छुट्टै ध्वनिका रूपमा बोलिँदैनन्।
वर्ण भनेको भाषाको त्यो सबैभन्दा सानो एकाइ हो जसलाई अझ टुक्र्याउन सकिँदैन। ध्वनिका रूपमा यो कथ्य वर्ण हो, चिह्नका रूपमा लेख्य वर्ण हो।
13.2 स्वरवर्णको वर्गीकरण
जुन ध्वनि उच्चारण गर्दा हावा मुखभित्र कतै नछेकिई बाहिर निस्कन्छ, त्यो स्वरवर्ण हो।
| आधार | भेद | वर्ण |
|---|---|---|
| मात्रा | ह्रस्व | अ, इ, उ, ऋ |
| दीर्घ | आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ | |
| बनोट | मूल (एकल) | अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ओ |
| संयुक्त (सन्ध्यक्षर) | ऐ (अ+इ), औ (अ+उ) | |
| जिब्रोको स्थान | अग्र | इ, ई, ए, ऐ |
| मध्य | अ, आ | |
| पश्च | उ, ऊ, ओ, औ | |
| ओठको आकार | वृत्ताकार | उ, ऊ, ओ, औ |
| अवृत्ताकार | अ, आ, इ, ई, ए, ऐ | |
| उच्चारण स्थान | कण्ठ्य | अ, आ |
| तालव्य | इ, ई | |
| ओष्ठ्य | उ, ऊ | |
| मूर्धन्य | ऋ | |
| कण्ठतालव्य | ए, ऐ | |
| कण्ठोष्ठ्य | ओ, औ |
अयोगवाह भनिने तीन चिह्न स्वर पनि होइनन्, व्यञ्जन पनि होइनन् — अनुस्वार (ं) जस्तै अंश, चन्द्रबिन्दु (ँ) जस्तै काठमाडौँ, र विसर्ग (ः) जस्तै दुःख।
13.3 व्यञ्जनको उच्चारण स्थान
जुन ध्वनि उच्चारण गर्दा हावा मुखभित्र कतै न कतै छेकिन्छ, त्यो व्यञ्जन हो। हावा जहाँ छेकिन्छ, त्यही ठाउँ उक्त व्यञ्जनको उच्चारण स्थान हो।
| उच्चारण स्थान | कहाँ छेकिन्छ | व्यञ्जन |
|---|---|---|
| कण्ठ्य | गलाको पछाडि, तालुको नरम भाग | क, ख, ग, घ, ङ, ह |
| तालव्य | तालु (कडा तालु) | च, छ, ज, झ, ञ, य, श |
| मूर्धन्य | मूर्धा (तालुको अगिल्लो उठेको भाग) | ट, ठ, ड, ढ, ण, र, ष |
| दन्त्य | माथिल्लो दाँतको पछाडि | त, थ, द, ध, न, ल, स |
| ओष्ठ्य | दुवै ओठ | प, फ, ब, भ, म |
| दन्त्योष्ठ्य | तल्लो ओठ र माथिल्लो दाँत | व |
क-वर्ग कण्ठमा, च-वर्ग तालुमा, ट-वर्ग मूर्धामा, त-वर्ग दाँतमा, प-वर्ग ओठमा। पाँच वर्ग, पाँच स्थान, पछाडिबाट अगाडि। बाँकी वर्ण यी पाँचमै मिल्न आउँछन् — ह कण्ठमा, य श तालुमा, र ष मूर्धामा, ल स दाँतमा।
13.4 प्रयत्न
हावा कसरी छेकिन्छ — पूरै रोकिन्छ, घस्रिँदै जान्छ, कि नाकबाट निस्कन्छ — त्यो रीतिलाई प्रयत्न भनिन्छ।
| प्रयत्न | के हुन्छ | वर्ण | सङ्ख्या |
|---|---|---|---|
| स्पर्श | हावा पूरै रोकिन्छ, अनि एकैचोटि छुट्छ | क ख ग घ, च छ ज झ, ट ठ ड ढ, त थ द ध, प फ ब भ | २० |
| नासिक्य | हावा नाकबाट निस्कन्छ | ङ, ञ, ण, न, म | ५ |
| उष्म (संघर्षी) | हावा साँघुरो बाटोबाट घस्रिन्छ | श, ष, स, ह | ४ |
| अन्तस्थ (अर्धस्वर) | स्वरजस्तै, तर थोरै छेकिन्छ | य, व | २ |
| लुण्ठित (कम्पित) | जिब्रोको टुप्पो काम्छ | र | १ |
| पार्श्विक | हावा जिब्रोको छेउबाट निस्कन्छ | ल | १ |
जोड = ३३ लेख्य व्यञ्जन।
13.5 घोषत्व
उच्चारण गर्दा स्वरतन्तु (गलाको तार) कामे भने त्यो सघोष, नकामे अघोष।
औँलाले घाँटीको बीचमा छोएर क… क… क… भन्नुहोस् — केही कम्पन आउँदैन, त्यसैले क अघोष हो। अब ग… ग… ग… भन्नुहोस् — घाँटी काँपेको महसुस हुन्छ, त्यसैले ग सघोष हो। परीक्षा हलमा पनि यो जाँच मनमनै गर्न सकिन्छ।
| घोषत्व | वर्ण | सङ्ख्या |
|---|---|---|
| अघोष | क, ख, च, छ, ट, ठ, त, थ, प, फ, श, ष, स | १३ |
| सघोष | ग, घ, ङ, ज, झ, ञ, ड, ढ, ण, द, ध, न, ब, भ, म, य, र, ल, व, ह | २० |
नियम सजिलो छ — हरेक वर्गका पहिलो दुई अक्षर अघोष, बाँकी तीन सघोष। श, ष, स अघोष; ह सघोष; य, र, ल, व सघोष।
13.6 प्राणत्व
उच्चारण गर्दा मुखबाट निस्कने हावाको मात्रा थोरै भए अल्पप्राण, धेरै भए महाप्राण।
| प्राणत्व | वर्ण | सङ्ख्या |
|---|---|---|
| अल्पप्राण | क, ग, ङ, च, ज, ञ, ट, ड, ण, त, द, न, प, ब, म, य, र, ल, व | १९ |
| महाप्राण | ख, घ, छ, झ, ठ, ढ, थ, ध, फ, भ, श, ष, स, ह | १४ |
हत्केला मुखअगाडि राखेर प भन्नुहोस् — हावा थोरै लाग्छ। अब फ भन्नुहोस् — हावाको झोक्का स्पष्ट लाग्छ। हावा धेरै = महाप्राण। नियम: वर्गका दोस्रो र चौथो अक्षर महाप्राण, अरू अल्पप्राण; श, ष, स, ह पनि महाप्राण।
13.7 पूर्ण वर्गीकरण तालिका
यो एउटै तालिका कण्ठस्थ पारे १३ नम्बर एकाइको आधा काम सकियो।
| वर्ग / स्थान | अघोष अल्पप्राण | अघोष महाप्राण | सघोष अल्पप्राण | सघोष महाप्राण | सघोष नासिक्य |
|---|---|---|---|---|---|
| कण्ठ्य (क-वर्ग) | क | ख | ग | घ | ङ |
| तालव्य (च-वर्ग) | च | छ | ज | झ | ञ |
| मूर्धन्य (ट-वर्ग) | ट | ठ | ड | ढ | ण |
| दन्त्य (त-वर्ग) | त | थ | द | ध | न |
| ओष्ठ्य (प-वर्ग) | प | फ | ब | भ | म |
वर्गबाहिरका व्यञ्जन:
| वर्ण | स्थान | प्रयत्न | घोषत्व | प्राणत्व |
|---|---|---|---|---|
| य | तालव्य | अन्तस्थ | सघोष | अल्पप्राण |
| र | मूर्धन्य | लुण्ठित | सघोष | अल्पप्राण |
| ल | दन्त्य | पार्श्विक | सघोष | अल्पप्राण |
| व | दन्त्योष्ठ्य | अन्तस्थ | सघोष | अल्पप्राण |
| श | तालव्य | उष्म | अघोष | महाप्राण |
| ष | मूर्धन्य | उष्म | अघोष | महाप्राण |
| स | दन्त्य | उष्म | अघोष | महाप्राण |
| ह | कण्ठ्य | उष्म | सघोष | महाप्राण |
प्रश्न. ढ वर्णको उच्चारण स्थान, प्रयत्न, घोषत्व र प्राणत्व लेख्नुहोस्।
समाधान. १. ढ कुन वर्गमा पर्छ? ट-वर्गमा (ट ठ ड ढ ण) → उच्चारण स्थान: मूर्धन्य। २. उच्चारण गर्दा हावा पूरै रोकिन्छ → प्रयत्न: स्पर्श। ३. वर्गको चौथो अक्षर हो, पहिलो दुईभन्दा पछाडि → घोषत्व: सघोष। ४. चौथो अक्षर महाप्राण हुन्छ → प्राणत्व: महाप्राण।
उत्तर. ढ = मूर्धन्य, स्पर्श, सघोष, महाप्राण।
प्रश्न. "दन्त्य, स्पर्श, अघोष, महाप्राण" — यो कुन वर्ण हो?
समाधान. १. दन्त्य भनेको त-वर्ग: त थ द ध न। २. स्पर्श भनेपछि न हट्यो (त्यो नासिक्य हो)। बाँकी: त थ द ध। ३. अघोष भनेपछि पहिलो दुई मात्र बाँकी: त, थ। ४. महाप्राण भनेको वर्गको दोस्रो अक्षर → थ।
उत्तर. थ।
प्रश्न. विशेष, ऋतु र दीर्घ शब्दमा लेख्य र कथ्य रूपको फरक देखाउनुहोस्।
समाधान.
| शब्द | लेख्य रूप | कथ्य (बोलिने) रूप | किन फरक |
|---|---|---|---|
| विशेष | वि-शे-ष | बि-से-स | व लाई ब, श र ष लाई स भनिन्छ |
| ऋतु | ऋ-तु | रि-तु | ऋ नेपालीमा छुट्टै स्वर होइन |
| दीर्घ | दी-र्घ | दि-र्घ | ई र इ को उच्चारण एउटै |
निष्कर्ष. लेख्य वर्ण ४४ भए पनि नेपालीमा वास्तवमा बोलिने वर्ण ३५ मात्र हुन् — ६ स्वर र २९ व्यञ्जन।
- स्थान र प्रयत्न साटिने। "स्पर्श" भनेको स्थान होइन, प्रयत्न हो। "कण्ठ्य" भनेको प्रयत्न होइन, स्थान हो।
- व को स्थान। धेरैले व लाई ओष्ठ्य लेख्छन्। यो दन्त्योष्ठ्य हो।
- श, ष, स को स्थान फरक-फरक हो — क्रमशः तालव्य, मूर्धन्य, दन्त्य। बोल्दा एउटै सुनिए पनि वर्गीकरणमा फरक पर्छ।
- ह लाई अघोष भन्ने। ह सघोष महाप्राण हो।
- ङ, ञ, ण, न, म लाई स्पर्श लेख्ने। यी नासिक्य हुन्।
- ऐ र औ लाई मूल स्वर भन्ने। यी संयुक्त स्वर हुन्।
पाठको सार
- कथ्य वर्ण = सुनिने ध्वनि; लेख्य वर्ण = देखिने चिह्न। नेपालीमा लेख्य वर्ण ४४ (११ स्वर + ३३ व्यञ्जन), कथ्य वर्ण ३५ (६ स्वर + २९ व्यञ्जन)।
- स्वरवर्णलाई मात्रा (ह्रस्व/दीर्घ), बनोट (मूल/संयुक्त), जिब्रोको स्थान र ओठको आकारका आधारमा बाँडिन्छ।
- व्यञ्जनका पाँच मुख्य उच्चारण स्थान: कण्ठ्य, तालव्य, मूर्धन्य, दन्त्य, ओष्ठ्य; व मात्र दन्त्योष्ठ्य।
- प्रयत्नका छ भेद: स्पर्श (२०), नासिक्य (५), उष्म (४), अन्तस्थ (२), लुण्ठित (१), पार्श्विक (१)।
- घोषत्व: अघोष १३, सघोष २०। हरेक वर्गका पहिलो दुई अघोष।
- प्राणत्व: अल्पप्राण १९, महाप्राण १४। हरेक वर्गका दोस्रो र चौथो महाप्राण; श, ष, स, ह पनि महाप्राण।
- कुनै व्यञ्जनको परिचय दिँदा स्थान → प्रयत्न → घोषत्व → प्राणत्व, यही क्रममा चारै लेख्ने।
अभ्यास
वर्णको पूरा परिचय दिनुहोस् (१ अङ्क)
- झ [1]
- ट [1]
- म [1]
- ष [1]
- व [1]
उत्तर
१. तालव्य, स्पर्श, सघोष, महाप्राण (च-वर्गको चौथो अक्षर)।
२. मूर्धन्य, स्पर्श, अघोष, अल्पप्राण (ट-वर्गको पहिलो अक्षर)।
३. ओष्ठ्य, नासिक्य, सघोष, अल्पप्राण (प-वर्गको पाँचौँ अक्षर, हावा नाकबाट)।
४. मूर्धन्य, उष्म, अघोष, महाप्राण (वर्गबाहिरको उष्म वर्ण)।
५. दन्त्योष्ठ्य, अन्तस्थ, सघोष, अल्पप्राण (तल्लो ओठ र माथिल्लो दाँत जोडिन्छ)।
दिइएको परिचयअनुसार वर्ण लेख्नुहोस् (१ अङ्क)
- कण्ठ्य, स्पर्श, सघोष, महाप्राण [1]
- ओष्ठ्य, स्पर्श, अघोष, महाप्राण [1]
- दन्त्य, नासिक्य, सघोष, अल्पप्राण [1]
- मूर्धन्य, लुण्ठित, सघोष, अल्पप्राण [1]
- कण्ठ्य, उष्म, सघोष, महाप्राण [1]
उत्तर
६. घ — क-वर्गको चौथो अक्षर।
७. फ — प-वर्गको दोस्रो अक्षर।
८. न — त-वर्गको पाँचौँ अक्षर।
९. र — जिब्रोको टुप्पो काम्ने एक मात्र वर्ण।
१०. ह — एक मात्र कण्ठ्य उष्म वर्ण।
खाली ठाउँ भर्नुहोस् (१ अङ्क)
- नेपालीमा लेख्य स्वरवर्ण ………… वटा र उच्चार्य स्वरवर्ण ………… वटा छन्। [1]
- ल को प्रयत्न ………… हो। [1]
- अनुस्वार, चन्द्रबिन्दु र विसर्गलाई सँगै ………… भनिन्छ। [1]
- हरेक वर्गका ………… र ………… अक्षर महाप्राण हुन्छन्। [1]
- ऐ र औ लाई ………… स्वर भनिन्छ। [1]
उत्तर
११. ११, ६ — ई, ऊ, ऋ, ऐ, औ नेपालीमा छुट्टै ध्वनि होइनन्।
१२. पार्श्विक — हावा जिब्रोको दुवै छेउबाट निस्कन्छ।
१३. अयोगवाह — यी स्वर पनि होइनन्, व्यञ्जन पनि होइनन्।
१४. दोस्रो, चौथो — जस्तै ख र घ, छ र झ।
१५. संयुक्त (सन्ध्यक्षर) — ऐ = अ + इ, औ = अ + उ।
छोटो उत्तर दिनुहोस् (३ अङ्क)
- कथ्य वर्ण र लेख्य वर्णबिच तीन भिन्नता उदाहरणसहित लेख्नुहोस्। [3]
- घोषत्व भनेको के हो? अघोष र सघोष वर्ण छुट्याउने उपाय उदाहरणसहित लेख्नुहोस्। [3]
- प्रयत्नका आधारमा व्यञ्जनका भेद उदाहरणसहित लेख्नुहोस्। [3]
- काठमाडौँ शब्दमा प्रयुक्त व्यञ्जनवर्णको उच्चारण स्थान छुट्याउनुहोस्। [3]
- नेपालीमा लेख्य व्यञ्जन ३३ हुँदाहुँदै उच्चार्य व्यञ्जन २९ मात्र किन हुन्छन्? [3]
उत्तर
१६. (क) कथ्य वर्ण सुनिन्छ, लेख्य वर्ण देखिन्छ। (ख) कथ्य स्वर ६, लेख्य स्वर ११। (ग) शिक्षा लेखिन्छ तर सिक्छा बोलिन्छ — लेख्य रूप र कथ्य रूप सधैँ मिल्दैनन्।
१७. उच्चारण गर्दा स्वरतन्तु काम्ने/नकाम्ने गुणलाई घोषत्व भनिन्छ। घाँटीमा औँला राखेर क भन्दा कम्पन हुँदैन (अघोष), ग भन्दा कम्पन हुन्छ (सघोष)। हरेक वर्गका पहिलो दुई अघोष, बाँकी तीन सघोष।
१८. स्पर्श (क, ट, प), नासिक्य (ङ, न, म), उष्म (श, स, ह), अन्तस्थ (य, व), लुण्ठित (र), पार्श्विक (ल) — जम्मा छ भेद; आधार हावा छेकिने रीति हो।
१९. क = कण्ठ्य, ठ = मूर्धन्य, म = ओष्ठ्य, ड = मूर्धन्य। (स्वर आ, औ र चन्द्रबिन्दु व्यञ्जन होइनन्।)
२०. श, ष, स को उच्चारण एउटै स हुन्छ (२ घट्यो), ञ र ण छुट्टै ध्वनिका रूपमा बोलिँदैनन् (२ घट्यो)। त्यसैले ३३ − ४ = २९ उच्चार्य व्यञ्जन रहन्छन्।
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