Unit 22 · व्याकरण · 10 min read
द्वित्व प्रक्रिया र सन्धि
What the syllabus asks for 5
- द्वित्व प्रक्रियाका भेद
- सन्धिका तीन भेद
- स्वर सन्धि
- व्यञ्जन सन्धि
- विसर्ग सन्धि
यो एकाइमा शब्दनिर्माणको चौथो प्रक्रिया द्वित्व र वर्णस्तरको जोडाइ सन्धि — दुवै पढिन्छन्। द्वित्वमा एउटै शब्द दोहोरिएर नयाँ अर्थ दिन्छ (घरघर, बिस्तारै-बिस्तारै), भने सन्धिमा दुई वर्ण जोडिएर ध्वनि नै फेरिन्छ (विद्या + आलय = विद्यालय)। परीक्षामा सन्धि-विच्छेद र सन्धि जोड्ने दुवै किसिमका प्रश्न आउँछन्; द्वित्व प्रायः पहिचान र अर्थका रूपमा सोधिन्छ।
एउटै शब्द वा त्यसको मिल्दो रूप दोहोर्याएर नयाँ शब्द बनाउने प्रक्रिया द्वित्व हो। दुई वर्ण नजिक आउँदा हुने ध्वनि-परिवर्तनलाई सन्धि, र जोडिएको शब्द फुकाउनुलाई सन्धि-विच्छेद भनिन्छ।
22.1 द्वित्व प्रक्रियाका भेद
| भेद | लक्षण | उदाहरण |
|---|---|---|
| पूर्ण द्वित्व | उही शब्द जस्ताको तस्तै दोहोरिने | घरघर, गाउँगाउँ, ठाउँठाउँ, फेरिफेरि, बिस्तारै-बिस्तारै, दिनदिनै |
| आंशिक द्वित्व | दोहोरिँदा एक-दुई ध्वनि फेरिने | उल्टोपुल्टो, टेढोमेढो, हल्लाखल्ला, चियासिया, भातसात, अलमल |
| अनुकरणात्मक द्वित्व | आवाज वा दृश्यको नक्कल गर्ने | झिलिमिली, टिकटिक, गडगड, सुरसुर, फटाफट, चटपट |
द्वित्वले दिने अर्थ
| अर्थ | उदाहरण | व्याख्या |
|---|---|---|
| बहुत्व (धेरै) | घरघर, ठाउँठाउँ | हरेक घर, धेरै ठाउँ |
| प्रत्येकता | दिनदिनै, वर्षैपिच्छे | हरेक दिन |
| निरन्तरता | बिस्तारै-बिस्तारै, हिँड्दाहिँड्दै | लगातार चलिरहेको |
| तीव्रता | राम्रैराम्रो, धेरैधेरै | जोड थपिएको |
| अनिश्चितता / "आदि" | चियासिया, भातसात | चिया वा त्यस्तै केही |
| अनुकरण | झिलिमिली, गडगड | ध्वनि वा दृश्यको नक्कल |
22.2 सन्धिका तीन भेद
22.3 स्वर सन्धि
दुई स्वर नजिक आउँदा हुने परिवर्तन स्वर सन्धि हो। यसका पाँच भेद छन्।
| भेद | नियम | उदाहरण |
|---|---|---|
| दीर्घ | अ/आ + अ/आ = आ | हिम + आलय = हिमालय; विद्या + आलय = विद्यालय |
| इ/ई + इ/ई = ई | कवि + इन्द्र = कवीन्द्र; गिरि + ईश = गिरीश | |
| उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ | गुरु + उपदेश = गुरूपदेश; भानु + उदय = भानूदय | |
| गुण | अ/आ + इ/ई = ए | देव + इन्द्र = देवेन्द्र; गण + ईश = गणेश |
| अ/आ + उ/ऊ = ओ | सूर्य + उदय = सूर्योदय; महा + उत्सव = महोत्सव | |
| अ/आ + ऋ = अर् | देव + ऋषि = देवर्षि; महा + ऋषि = महर्षि | |
| वृद्धि | अ/आ + ए/ऐ = ऐ | एक + एक = एकैक; मत + ऐक्य = मतैक्य |
| अ/आ + ओ/औ = औ | वन + ओषधि = वनौषधि; महा + औषध = महौषध | |
| यण् | इ/ई + असमान स्वर = य् | अति + अन्त = अत्यन्त; प्रति + एक = प्रत्येक; इति + आदि = इत्यादि |
| उ/ऊ + असमान स्वर = व् | सु + आगत = स्वागत; अनु + एषण = अन्वेषण | |
| ऋ + असमान स्वर = र् | पितृ + आदेश = पित्रादेश | |
| अयादि | ए + अ = अय् | ने + अन = नयन; शे + अन = शयन |
| ऐ + अ = आय् | नै + अक = नायक; गै + अक = गायक | |
| ओ + अ = अव् | पो + अन = पवन; भो + अन = भवन | |
| औ + अ = आव् | पौ + अक = पावक; भौ + उक = भावुक |
दी-गु-वृ-य-अ — दीर्घ (उस्तै स्वर मिल्दा), गुण (अ + इ/उ), वृद्धि (अ + ए/ओ), यण् (इ/उ + फरक स्वर, स्वर व्यञ्जन बन्छ), अयादि (ए/ओ + स्वर, अय्/अव् बन्छ)। पहिलो प्रश्न सधैँ — "पहिलो स्वर के, दोस्रो स्वर के?"
22.4 व्यञ्जन सन्धि
व्यञ्जनपछि अर्को वर्ण आउँदा हुने परिवर्तन व्यञ्जन सन्धि हो।
| नियम | उदाहरण |
|---|---|
| त् + च = च्च | सत् + चरित्र = सच्चरित्र |
| त् + छ / श = च्छ | उत् + छेद = उच्छेद; उत् + श्वास = उच्छ्वास |
| त् + ज = ज्ज | सत् + जन = सज्जन |
| त् + ल = ल्ल | उत् + लेख = उल्लेख; तत् + लीन = तल्लीन |
| त् + न = न्न | उत् + नति = उन्नति |
| त् + म = न्म | तत् + मय = तन्मय |
| त् + ह = द्ध | उत् + हार = उद्धार |
| म् + क-वर्ग = ङ् | सम् + कल्प = सङ्कल्प |
| म् + च-वर्ग = ञ् | सम् + चय = सञ्चय |
| म् + त-वर्ग = न् | सम् + तोष = सन्तोष |
| म् + प-वर्ग = म् | सम् + पूर्ण = सम्पूर्ण |
| स् → ष् (षत्व) | नि + सिद्ध = निषिद्ध; अभि + सेक = अभिषेक |
| न् → ण् (णत्व) | परि + नाम = परिणाम; प्र + मान = प्रमाण |
22.5 विसर्ग सन्धि
विसर्ग (ः) पछि अर्को वर्ण आउँदा हुने परिवर्तन विसर्ग सन्धि हो।
| नियम | उदाहरण |
|---|---|
| ः + च / छ = श् | निः + चय = निश्चय; दुः + चरित्र = दुश्चरित्र |
| ः + त / थ = स् | निः + तेज = निस्तेज; नमः + ते = नमस्ते |
| ः + क / प = ष् | निः + फल = निष्फल; दुः + कर = दुष्कर |
| ः + स्वर वा सघोष व्यञ्जन = र् | निः + आश = निराश; दुः + जन = दुर्जन; निः + धन = निर्धन |
| अः + सघोष = ओ | मनः + रथ = मनोरथ; तपः + बल = तपोबल; यशः + दा = यशोदा |
| ः + स = ः यथावत् | दुः + साहस = दुःसाहस; अन्तः + करण = अन्तःकरण |
प्रश्न. सूर्योदय को सन्धि-विच्छेद गरी भेद तोक्नुहोस्।
समाधान. १. जोडिएको ठाउँ खोज्ने. शब्दको बिचमा यो छ — यहीँ जोड भएको हो। २. कुन ध्वनि बन्यो हेर्ने. ओ बनेको छ। ३. नियम सम्झने. अ/आ + उ/ऊ = ओ — यो गुण सन्धि हो। ४. फुकाउने. ओ लाई अ + उ मा फर्काउने: सूर्य् + अ + उ + दय। ५. उत्तर. सूर्योदय = सूर्य + उदय, गुण स्वर सन्धि।
जाँच. फेरि जोडेर हेर्नुहोस् — सूर्य + उदय → य पछिको अ र उ मिलेर ओ भयो → सूर्योदय। मिल्यो।
प्रश्न. हिमालय, देवेन्द्र, मतैक्य, अत्यन्त — चारैको विच्छेद गरी भेद छुट्याउनुहोस्।
समाधान.
| शब्द | विच्छेद | मिलेका स्वर | भेद |
|---|---|---|---|
| हिमालय | हिम + आलय | अ + आ = आ | दीर्घ |
| देवेन्द्र | देव + इन्द्र | अ + इ = ए | गुण |
| मतैक्य | मत + ऐक्य | अ + ऐ = ऐ | वृद्धि |
| अत्यन्त | अति + अन्त | इ + अ = य् | यण् |
निष्कर्ष. पहिलो स्वर र दोस्रो स्वर कुन-कुन हुन् — यही दुई कुरा थाहा पाए भेद आफैँ निस्कन्छ।
प्रश्न. गाउँगाउँ, उल्टोपुल्टो, झिलिमिली, आमाबुबा — कुन-कुन द्वित्व हुन्? कुन होइन?
समाधान. १. गाउँगाउँ — उही शब्द जस्ताको तस्तै दोहोरियो → पूर्ण द्वित्व, अर्थ "हरेक गाउँ"। २. उल्टोपुल्टो — उल्टो दोहोरिँदा उ को ठाउँमा पु भयो → आंशिक द्वित्व। ३. झिलिमिली — कुनै स्वतन्त्र शब्दको दोहोरो होइन, दृश्यको नक्कल हो → अनुकरणात्मक द्वित्व। ४. आमाबुबा — यहाँ आमा र बुबा दुई फरक शब्द छन्, दोहोरो होइन → द्वित्व होइन, द्वन्द्व समास हो।
जाँचको सूत्र. दुई पद फरक अर्थका स्वतन्त्र शब्द भए समास; एउटै शब्द वा त्यसको मिल्दो रूप दोहोरिए द्वित्व।
- सन्धि र समास साट्ने। हिमालय सन्धि हो (वर्ण जोडियो), राजकुमार समास हो (शब्द जोडियो)। फुकाउने नाम पनि फरक — सन्धि-विच्छेद र विग्रह।
- द्वित्व र द्वन्द्व समास साट्ने। घरघर द्वित्व, घरबार र आमाबुबा द्वन्द्व समास।
- विच्छेदमा गलत स्वर फर्काउने। सूर्योदय = सूर्य + ओदय होइन; ओ लाई अ + उ मा फर्काएर सूर्य + उदय लेख्नुपर्छ।
- यण् र अयादि उल्टाउने। पहिलो स्वर इ/उ भए यण् (अत्यन्त), पहिलो स्वर ए/ऐ/ओ/औ भए अयादि (नयन, नायक)।
- विसर्गलाई सधैँ र् बनाउने। निश्चय मा श्, निष्फल मा ष्, निस्तेज मा स् हुन्छ — पछिको वर्णले तय गर्छ।
- हलन्त छुटाउने। विच्छेदमा उत् + नति लेख्नुपर्छ, उत + नति होइन।
सन्धिको प्रश्नमा दुई कुरा लेख्नुहोस् — विच्छेद र भेदको नाम। जस्तै: सूर्योदय = सूर्य + उदय (गुण स्वर सन्धि)। भेद नलेखे आधा अङ्क जान्छ। लेखेपछि फेरि जोडेर जाँच्नुहोस् — जोड्दा उही शब्द बन्यो भने उत्तर पक्का ठिक छ।
पाठको सार
- द्वित्वका तीन भेद: पूर्ण (घरघर), आंशिक (उल्टोपुल्टो), अनुकरणात्मक (झिलिमिली)।
- द्वित्वले बहुत्व, प्रत्येकता, निरन्तरता, तीव्रता, अनिश्चितता र अनुकरणको अर्थ दिन्छ।
- सन्धिका तीन भेद: स्वर, व्यञ्जन, विसर्ग।
- स्वर सन्धिका पाँच उपभेद: दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण्, अयादि।
- व्यञ्जन सन्धिमा त् र म् का परिवर्तन सबैभन्दा धेरै सोधिन्छन्।
- विसर्ग सन्धिमा पछिको वर्ण हेरेर श्, स्, ष्, र्, ओ मध्ये कुन हुने तय हुन्छ।
- सन्धिमा वर्ण जोडिन्छ; समासमा शब्द; द्वित्वमा एउटै शब्द दोहोरिन्छ।
अभ्यास
सन्धि-विच्छेद गरी भेद तोक्नुहोस् (१ अङ्क)
- हिमालय [1]
- सूर्योदय [1]
- मतैक्य [1]
- अत्यन्त [1]
- नायक [1]
- उन्नति [1]
- सञ्चय [1]
- निश्चय [1]
- मनोरथ [1]
- गुरूपदेश [1]
उत्तर
१. हिम + आलय — अ + आ = आ, दीर्घ स्वर सन्धि।
२. सूर्य + उदय — अ + उ = ओ, गुण सन्धि।
३. मत + ऐक्य — अ + ऐ = ऐ, वृद्धि सन्धि।
४. अति + अन्त — इ + अ = य्, यण् सन्धि।
५. नै + अक — ऐ + अ = आय्, अयादि सन्धि।
६. उत् + नति — त् को न् भयो, व्यञ्जन सन्धि।
७. सम् + चय — म् को ञ् भयो, व्यञ्जन सन्धि।
८. निः + चय — विसर्गको श् भयो, विसर्ग सन्धि।
९. मनः + रथ — अः को ओ भयो, विसर्ग सन्धि।
१०. गुरु + उपदेश — उ + उ = ऊ, दीर्घ सन्धि।
सन्धि गरी लेख्नुहोस् (१ अङ्क)
- देव + इन्द्र [1]
- महा + उत्सव [1]
- सु + आगत [1]
- उत् + लेख [1]
- निः + फल [1]
- सत् + जन [1]
उत्तर
११. देवेन्द्र — अ + इ = ए, गुण।
१२. महोत्सव — आ + उ = ओ, गुण।
१३. स्वागत — उ + आ = व्, यण्।
१४. उल्लेख — त् + ल = ल्ल, व्यञ्जन सन्धि।
१५. निष्फल — विसर्गको ष् भयो।
१६. सज्जन — त् + ज = ज्ज।
द्वित्वको भेद तोक्नुहोस् (१ अङ्क)
- ठाउँठाउँ [1]
- टेढोमेढो [1]
- फटाफट [1]
- दिनदिनै [1]
उत्तर
१७. पूर्ण द्वित्व — उही शब्द जस्ताको तस्तै दोहोरियो, अर्थ "धेरै ठाउँ"।
१८. आंशिक द्वित्व — टे को ठाउँमा मे भयो।
१९. अनुकरणात्मक द्वित्व — छिटो चालको नक्कल।
२०. पूर्ण द्वित्व — प्रत्येकता जनायो, "हरेक दिन"।
छोटो उत्तर दिनुहोस् (३ अङ्क)
- द्वित्वका तीन भेद उदाहरणसहित लेख्नुहोस्। [3]
- द्वित्वले दिने कुनै चार अर्थ उदाहरणसहित लेख्नुहोस्। [3]
- स्वर सन्धिका पाँच भेद एक-एक उदाहरणसहित लेख्नुहोस्। [3]
- गुण र वृद्धि सन्धि कसरी छुट्याउने? दुई-दुई उदाहरण दिनुहोस्। [3]
- यण् र अयादि सन्धिको भिन्नता उदाहरणसहित स्पष्ट पार्नुहोस्। [3]
- विसर्ग सन्धिका चार नियम उदाहरणसहित लेख्नुहोस्। [3]
- सन्धि, समास र द्वित्वको भिन्नता उदाहरणसहित छुट्याउनुहोस्। [3]
- म् पछि व्यञ्जन आउँदा हुने चार परिवर्तन उदाहरणसहित देखाउनुहोस्। [3]
उत्तर
२१. पूर्ण — गाउँगाउँ (उही शब्द दोहोरियो); आंशिक — हल्लाखल्ला (एक ध्वनि फेरियो); अनुकरणात्मक — टिकटिक (आवाजको नक्कल)।
२२. बहुत्व — ठाउँठाउँ; प्रत्येकता — दिनदिनै; निरन्तरता — बिस्तारै-बिस्तारै; अनिश्चितता — चियासिया।
२३. दीर्घ — हिमालय; गुण — देवेन्द्र; वृद्धि — मतैक्य; यण् — अत्यन्त; अयादि — नयन।
२४. गुणमा अ/आ सँग इ/उ/ऋ मिल्छ र ए/ओ/अर् बन्छ — देवेन्द्र, सूर्योदय। वृद्धिमा अ/आ सँग ए/ऐ/ओ/औ मिल्छ र ऐ/औ बन्छ — मतैक्य, महौषध। दोस्रो स्वर कस्तो छ, त्यसैले छुट्टिन्छ।
२५. यण्मा पहिलो स्वर इ/उ/ऋ हुन्छ र त्यो य्/व्/र् व्यञ्जन बन्छ — अत्यन्त, स्वागत। अयादिमा पहिलो स्वर ए/ऐ/ओ/औ हुन्छ र अय्/आय्/अव्/आव् बन्छ — नयन, नायक, पवन।
२६. ः + च = श् (निश्चय); ः + त = स् (निस्तेज); ः + प/क = ष् (निष्फल); ः + सघोष वा स्वर = र् (निराश)।
२७. सन्धि — वर्ण जोडिन्छ, ध्वनि फेरिन्छ (हिम + आलय = हिमालय)। समास — दुई फरक शब्द जोडिन्छन्, विभक्ति लोप हुन्छ (राजाको कुमार = राजकुमार)। द्वित्व — एउटै शब्द दोहोरिन्छ (घरघर)।
२८. म् + क-वर्ग = ङ् (सङ्कल्प); म् + च-वर्ग = ञ् (सञ्चय); म् + त-वर्ग = न् (सन्तोष); म् + प-वर्ग = म् (सम्पूर्ण)।
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