Unit 17 · व्याकरण · 11 min read
क्रियाका काल र पक्ष; वर्णविन्यास
What the syllabus asks for 5
- काल
- पक्ष
- काल-पक्ष ग्रिड — बाह्र खाना
- वर्णविन्यास — पाँच नियम
- शुद्ध र अशुद्ध — जोडीमा हेर्नुहोस्
"ऊ गर्छ", "ऊ गर्दै छ", "उसले गरेको छ", "ऊ गर्थ्यो" — चारै वाक्यमा कर्ता उही, धातु उही, तर कहिले र कसरी काम भयो भन्ने फरक छ। पहिलोलाई काल भनिन्छ, दोस्रोलाई पक्ष। परीक्षामा काल-पक्ष-भाव-वाच्य मिलेर ५ अङ्क आउँछ, त्यसमध्ये काल र पक्ष सबैभन्दा नियमित र सजिलो कमाइ हो — किनभने यो बाह्र खानाको एउटै तालिकामा अटाउँछ। यसै अध्यायमा वर्णविन्यास पनि छ, जसबाट छुट्टै ३ अङ्क आउँछ र जसले "शुद्ध पारी लेख्नुहोस्" भन्ने हरेक प्रश्नमा हात हाल्छ।
(१) दिइएको क्रियाको काल भन्न सक्नु। (२) त्यसैको पक्ष भन्न सक्नु — यी दुई सधैँ सँगै सोधिन्छन्। (३) एउटै धातुलाई बाह्रै खानामा रूपान्तरण गर्न सक्नु। (४) वर्णविन्यासका पाँच मुख्य नियम (ह्रस्व-दीर्घ, श-ष-स, व-ब, पञ्चम वर्ण, पदयोग) लगाएर शब्द शुद्ध पार्न सक्नु।
17.1 काल
क्रियाले जनाउने कामको समयलाई काल भनिन्छ। नेपालीमा तीन काल छन् — वर्तमान (अहिले), भूत (बितेको), भविष्यत् (आउने)।
| काल | चिनो | उदाहरण |
|---|---|---|
| वर्तमान | -छ, -छु, -छौ, -छन् | ऊ भात खान्छ। |
| भूत | -यो, -ए, -इन्, थियो | उसले भात खायो। |
| भविष्यत् | -नेछ, -नेछु, -लान् | ऊ भात खानेछ। |
17.2 पक्ष
कामको अवस्था — सुरु भएको, चलिरहेको, सकिएको कि बानी बनेको — जनाउने व्याकरणिक कोटिलाई पक्ष भनिन्छ। नेपालीमा चार पक्ष मानिन्छन् — सामान्य, अपूर्ण, पूर्ण, अभ्यस्त।
| पक्ष | के जनाउँछ | चिनो | नमुना |
|---|---|---|---|
| सामान्य | काम भयो/हुन्छ, विस्तार छैन | सोझो रूप | गर्छ, गर्यो, गर्नेछ |
| अपूर्ण | काम चलिरहेको | -दै + हुनु | गर्दै छ, गर्दै थियो |
| पूर्ण | काम सकिएको | -एको + हुनु | गरेको छ, गरेको थियो |
| अभ्यस्त | काम बानी/नियमित | -ने गर्नु, -थ्यो | गर्ने गर्छ, गर्थ्यो |
काल समय बताउँछ, पक्ष अवस्था। त्यसैले हरेक क्रियामा दुवै हुन्छन् — गर्दै थियो को काल भूत हो र पक्ष अपूर्ण। "यो भूतकाल हो" भनेर मात्र उत्तर लेख्दा आधा अङ्क काटिन्छ; दुवै लेख्नुहोस्।
17.3 काल-पक्ष ग्रिड — बाह्र खाना
| रूप | काल | पक्ष |
|---|---|---|
| ऊ गर्छ | वर्तमान | सामान्य |
| ऊ गर्दै छ | वर्तमान | अपूर्ण |
| उसले गरेको छ | वर्तमान | पूर्ण |
| ऊ गर्ने गर्छ | वर्तमान | अभ्यस्त |
| उसले गर्यो | भूत | सामान्य |
| ऊ गर्दै थियो | भूत | अपूर्ण |
| उसले गरेको थियो | भूत | पूर्ण |
| ऊ गर्थ्यो | भूत | अभ्यस्त |
| ऊ गर्नेछ | भविष्यत् | सामान्य |
| ऊ गर्दै हुनेछ | भविष्यत् | अपूर्ण |
| उसले गरिसकेको हुनेछ | भविष्यत् | पूर्ण |
| ऊ गर्ने गर्नेछ | भविष्यत् | अभ्यस्त |
दुवै भूतकालका हुन्, तर पक्ष फरक छ। ऊ गर्थ्यो = अभ्यस्त भूत — पहिले नियमित गर्ने बानी थियो। उसले गरेको थियो = पूर्ण भूत — एक पटक गरेर सकिएको थियो। "ऊ हरेक दिन आउँथ्यो" (अभ्यस्त) र "ऊ आएको थियो" (पूर्ण) को अर्थ उस्तै होइन।
काल-पक्ष चिन्ने तीन-चरणको कसोटी
| चरण | के हेर्ने | निष्कर्ष |
|---|---|---|
| १ | सहायक क्रिया के छ ? | छ → वर्तमान; थियो → भूत; हुनेछ → भविष्यत् |
| २ | सहायक क्रिया छैन भने मुख्य क्रियाको अन्त्य | -छ → वर्तमान; -यो/-ए → भूत; -नेछ → भविष्यत् |
| ३ | मुख्य क्रियाको प्रत्यय के छ ? | -दै → अपूर्ण; -एको → पूर्ण; -थ्यो/-ने गर्नु → अभ्यस्त; केही छैन → सामान्य |
नमुना — "उनीहरू खेल्दै थिए।" चरण १: थिए → भूत। चरण ३: -दै → अपूर्ण। उत्तर: अपूर्ण भूत।
17.4 वर्णविन्यास — पाँच नियम
वर्णविन्यास भनेको शब्दलाई मानक रूपमा लेख्ने पद्धति हो। कक्षा ११ मा तपाईंले वर्णको पहिचान गर्नुभयो; यहाँ ती वर्णलाई शुद्ध क्रममा लेख्ने नियम लागू गर्नुपर्छ।
(क) ह्रस्व र दीर्घ
| नियम | उदाहरण |
|---|---|
| नेपाली शब्दको बिचमा ह्रस्व | बिहान, बिरामी, चिनी, किन, सिकाइ, बिच |
| नेपाली शब्दको अन्त्यमा दीर्घ | पानी, चिठी, साथी, खुसी, बहिनी, टोपी |
| तत्सम शब्द संस्कृतकै रूपमा | सूर्य, पूर्व, दीर्घ, गीत, विद्या |
| तत्सम अन्त्यमा ह्रस्व हुने वर्ग | कवि, मुनि, रवि, गुरु, वायु, मति |
(ख) श, ष, स
| नियम | उदाहरण |
|---|---|
| तत्सम शब्दमा जे थियो त्यही | शिक्षा, शब्द, भाषा, षट्कोण, समय |
| नेपाली (तद्भव/आगन्तुक) शब्दमा स | सक्नु, सम्झनु, साथी, सपना |
(ग) व र ब
| नियम | उदाहरण |
|---|---|
| तत्सम शब्दमा व | विद्या, वन, सेवा, वर्ष, स्वतन्त्र |
| नेपाली/आगन्तुक शब्दमा ब | बाटो, बिहान, बहिनी, बोल्नु, किबल |
(घ) पञ्चम वर्ण र शिरबिन्दु
वर्गीय व्यञ्जनअघि त्यसै वर्गको पञ्चम वर्ण (ङ ञ ण न म) लेखिन्छ; य र ल व श ष स ह अघि र स्वरअघि शिरबिन्दु (ं) लेखिन्छ।
| वर्ग | पञ्चम वर्ण | उदाहरण |
|---|---|---|
| क-वर्ग | ङ् | अङ्क, लङ्गड |
| च-वर्ग | ञ् | चञ्चल, पञ्जा |
| ट-वर्ग | ण् | घण्टा, ठण्डा |
| त-वर्ग | न् | सन्तोष, बन्धन |
| प-वर्ग | म् | सम्बन्ध, लाम्पु |
(च) हलन्त र अजन्त
| नियम | उदाहरण |
|---|---|
| अन्त्यमा व्यञ्जन उच्चारण हुने ठाउँमा हलन्त | गर्छस्, छन्, भएन्, हुन्छ |
| तत्सम शब्दको अन्त्यमा अकार सुनिने ठाउँमा हलन्त नलगाउने | कमल (× कमल्), फल (× फल्) |
| संयुक्त व्यञ्जन बनाउँदा बिचमा हलन्त | विद्या → विद्या; उत्सव |
(छ) चन्द्रबिन्दु
नाकबाट स्वर उच्चारण हुने ठाउँमा चन्द्रबिन्दु (ँ) लेखिन्छ, शिरबिन्दु होइन।
| × अशुद्ध | ✓ शुद्ध |
|---|---|
| गरिन (गर्ने अर्थमा) | गरिँन् |
| हिडनु | हिँड्नु |
| गाउ | गाउँ |
| दात | दाँत |
| जादा | जाँदा |
शिरबिन्दु (ं) पछि व्यञ्जन आउँछ र त्यो व्यञ्जनको अनुनासिक रूप हो — संसार, संवाद। चन्द्रबिन्दु (ँ) ले स्वर आफैँ नाकबाट उच्चारण भएको जनाउँछ — गाउँ, दाँत, जाँदा। × गांउ, × दांत अशुद्ध हुन्।
(ज) पदयोग र पदवियोग
| नियम | जोडिने | छुट्टिने |
|---|---|---|
| नामयोगी | घरमाथि, रुखमुनि, बाटोभरि | — |
| संयुक्त क्रिया | — | गर्न सक्छु, पढ्न थाल्यो |
| विभक्ति | रामले, घरमा, उसलाई | — |
| सहायक क्रिया | — | गर्दै छ, गरेको थियो |
17.5 शुद्ध र अशुद्ध — जोडीमा हेर्नुहोस्
| × अशुद्ध | ✓ शुद्ध | किन |
|---|---|---|
| बीहान | बिहान | नेपाली शब्दको बिचमा ह्रस्व |
| बीरामी | बिरामी | बिचमा ह्रस्व |
| पानि | पानी | नेपाली शब्दको अन्त्यमा दीर्घ |
| चिठि | चिठी | अन्त्यमा दीर्घ |
| सुर्य | सूर्य | तत्सम, मूल रूप कायम |
| कवी | कवि | तत्सम अन्त्यमा ह्रस्व |
| गुरू | गुरु | तत्सम अन्त्यमा ह्रस्व |
| शक्नु | सक्नु | नेपाली शब्दमा स |
| भाशा | भाषा | तत्सम रूप कायम |
| शिक्षा (× सिक्षा) | शिक्षा | तत्सम रूप कायम |
| वाटो | बाटो | नेपाली शब्दमा ब |
| बिद्या | विद्या | तत्सम शब्दमा व |
| सेबा | सेवा | तत्सम शब्दमा व |
| अंक | अङ्क | क-वर्गअघि पञ्चम वर्ण |
| संबन्ध | सम्बन्ध | प-वर्गअघि म् |
| संतोष | सन्तोष | त-वर्गअघि न् |
| घंटा | घण्टा | ट-वर्गअघि ण् |
| सम्वाद | संवाद | व अघि शिरबिन्दु |
| सन्यास | संन्यास | न अघि शिरबिन्दु |
| सम्सार | संसार | स अघि शिरबिन्दु |
| घर माथि | घरमाथि | नामयोगी जोडिन्छ |
| रामले (× राम ले) | रामले | विभक्ति जोडिन्छ |
| गर्नसक्छु | गर्न सक्छु | संयुक्त क्रिया छुट्टिन्छ |
| गर्दैछ | गर्दै छ | सहायक क्रिया छुट्टिन्छ |
| ऊ गर्थ्यो — पूर्ण भूत | ऊ गर्थ्यो — अभ्यस्त भूत | बानी जनायो |
| गरेको थियो — अभ्यस्त | गरेको थियो — पूर्ण भूत | काम सकिएको |
| गर्दै छ — सामान्य वर्तमान | गर्दै छ — अपूर्ण वर्तमान | काम चलिरहेको |
| हिडनु | हिँड्नु | चन्द्रबिन्दु छुट्यो |
| गांउ | गाउँ | चन्द्रबिन्दु हो, शिरबिन्दु होइन |
| दांत | दाँत | चन्द्रबिन्दु |
| जादा | जाँदा | चन्द्रबिन्दु |
| कमल् | कमल | तत्सम अन्त्यमा हलन्त नलाग्ने |
| उनीहरू छन (हलन्तबिना) | उनीहरू छन् | अन्त्य व्यञ्जन उच्चारित |
प्रश्न. "हामी त्यतिबेला खाना खाँदै थियौँ।" — क्रियाको काल र पक्ष लेख्नुहोस्।
समाधान. १. सहायक क्रिया थियौँ छ → भूतकाल। २. मुख्य क्रियामा -दै प्रत्यय छ → काम चलिरहेको। ३. त्यसैले पक्ष अपूर्ण।
उत्तर. काल — भूत; पक्ष — अपूर्ण (अपूर्ण भूतकाल)।
प्रश्न. "ऊ गीत गाउँछ।" लाई अपूर्ण भूत, पूर्ण वर्तमान र अभ्यस्त भूतमा फेर्नुहोस्।
समाधान. अपूर्ण भूत — -दै + थियो: ऊ गीत गाउँदै थियो। पूर्ण वर्तमान — -एको + छ: उसले गीत गाएको छ। (गाउनु सकर्मक भएकाले कर्तामा ले।) अभ्यस्त भूत — -थ्यो: ऊ गीत गाउँथ्यो।
प्रश्न. "बीहान सम्बाद सुनेर उसले अंक गन्यो।" — अशुद्ध शब्द शुद्ध पारी नियम लेख्नुहोस्।
समाधान. १. बीहान → बिहान — नेपाली शब्दको बिचमा ह्रस्व इ। २. सम्बाद → संवाद — व अन्तस्थ हो, त्यसअघि शिरबिन्दु लाग्छ, म् होइन। ३. अंक → अङ्क — क वर्गीय व्यञ्जन हो, त्यसअघि क-वर्गको पञ्चम वर्ण ङ् लाग्छ।
उत्तर. बिहान संवाद सुनेर उसले अङ्क गन्यो।
प्रश्न. "बुबा हरेक बिहान पूजा गर्नुहुन्थ्यो।" र "बुबाले पूजा गर्नुभएको थियो।" — दुवैको काल-पक्ष लेखी अर्थगत भिन्नता देखाउनुहोस्।
समाधान. १. दुवैमा सहायक/अन्त्य रूपले भूतकाल जनाउँछ। २. पहिलोमा -हुन्थ्यो छ र हरेक बिहान ले नियमितता जनाउँछ → अभ्यस्त भूत। ३. दोस्रोमा -एको + थियो छ → पूर्ण भूत। ४. अर्थ फरक — पहिलोले बानी (नियमित रूपमा गर्नुहुन्थ्यो) जनाउँछ; दोस्रोले एक पटक गरेर सकिएको काम जनाउँछ।
उत्तर. पहिलो — भूत/अभ्यस्त; दोस्रो — भूत/पूर्ण। काल उही, पक्ष फरक, त्यसैले अर्थ पनि फरक।
पाठको सार
- काल = कामको समय (वर्तमान, भूत, भविष्यत्); पक्ष = कामको अवस्था (सामान्य, अपूर्ण, पूर्ण, अभ्यस्त)।
- तीन काल × चार पक्ष = बाह्र रूप। उत्तरमा दुवै लेख्नुपर्छ।
- -दै + हुनु = अपूर्ण; -एको + हुनु = पूर्ण; -थ्यो / -ने गर्नु = अभ्यस्त।
- गर्थ्यो (अभ्यस्त भूत — बानी) र गरेको थियो (पूर्ण भूत — सकिएको) फरक हुन्।
- शिरबिन्दु (ं) पछि व्यञ्जन आउँछ; चन्द्रबिन्दु (ँ) ले स्वर आफैँ अनुनासिक भएको जनाउँछ — संसार बनाम गाउँ।
- वर्णविन्यासका मुख्य नियम: ह्रस्व-दीर्घ (नेपाली शब्दको बिचमा ह्रस्व, अन्त्यमा दीर्घ; तत्सम मूल रूपमै), श-ष-स (तत्सममा यथावत्, नेपालीमा स), व-ब (तत्सममा व, नेपालीमा ब), पञ्चम वर्ण (वर्गीय व्यञ्जनअघि) बनाम शिरबिन्दु (य र ल व श ष स ह अघि), र पदयोग-वियोग।
अभ्यास
काल र पक्ष लेख्नुहोस् (१ अङ्क)
- ऊ पुस्तक पढ्दै छ। [1]
- उसले पुस्तक पढेको थियो। [1]
- ऊ हरेक बिहान पुस्तक पढ्थ्यो। [1]
- ऊ भोलि पुस्तक पढ्नेछ। [1]
- उसले पुस्तक पढिसकेको हुनेछ। [1]
उत्तर
१. काल — वर्तमान; पक्ष — अपूर्ण।
२. काल — भूत; पक्ष — पूर्ण।
३. काल — भूत; पक्ष — अभ्यस्त (नियमित बानी)।
४. काल — भविष्यत्; पक्ष — सामान्य।
५. काल — भविष्यत्; पक्ष — पूर्ण।
निर्देशनअनुसार रूपान्तरण गर्नुहोस् (१ अङ्क)
- ऊ चिठी लेख्छ। (अपूर्ण वर्तमानमा) [1]
- ऊ चिठी लेख्छ। (पूर्ण भूतमा) [1]
- ऊ चिठी लेख्छ। (अभ्यस्त भूतमा) [1]
- ऊ चिठी लेख्छ। (सामान्य भविष्यत्मा) [1]
- ऊ चिठी लेख्छ। (पूर्ण वर्तमानमा) [1]
उत्तर
६. ऊ चिठी लेख्दै छ।
७. उसले चिठी लेखेको थियो। — पूर्ण पक्षमा सकर्मक कर्तामा ले।
८. ऊ चिठी लेख्थ्यो।
९. ऊ चिठी लेख्नेछ।
१०. उसले चिठी लेखेको छ।
शुद्ध पार्नुहोस् (१ अङ्क)
- बीहानै उठेर पानि खानु राम्रो हो। [1]
- उसको सम्बाद सुनेर सबै खुसि भए। [1]
- परीक्षामा अंक राम्रो आयो। [1]
- बिद्यालयको सेबा प्रशंसनीय छ। [1]
- घंटा बज्नासाथ सन्तोश भयो। [1]
उत्तर
११. बिहानै उठेर पानी खानु राम्रो हो। — बिहान बिचमा ह्रस्व; पानी अन्त्यमा दीर्घ।
१२. उसको संवाद सुनेर सबै खुसी भए। — व अघि शिरबिन्दु; खुसी अन्त्यमा दीर्घ।
१३. परीक्षामा अङ्क राम्रो आयो। — क-वर्गअघि ङ्।
१४. विद्यालयको सेवा प्रशंसनीय छ। — दुवै तत्सम, व लाग्छ।
१५. घण्टा बज्नासाथ सन्तोष भयो। — ट-वर्गअघि ण्; सन्तोष तत्सम, ष कायम।
पञ्चम वर्ण कि शिरबिन्दु — शुद्ध रूप लेख्नुहोस् (१ अङ्क)
- च + ? + चल [1]
- स + ? + योग [1]
- ल + ? + गड [1]
- स + ? + रचना [1]
- ब + ? + धन [1]
उत्तर
१६. चञ्चल — च च-वर्गको हो, पञ्चम वर्ण ञ्।
१७. संयोग — य अन्तस्थ हो, शिरबिन्दु।
१८. लङ्गड — ग क-वर्गको हो, पञ्चम वर्ण ङ्।
१९. संरचना — र अन्तस्थ हो, शिरबिन्दु।
२०. बन्धन — ध त-वर्गको हो, पञ्चम वर्ण न्।
छोटो उत्तर दिनुहोस् (३ अङ्क)
- काल र पक्षबिचको भिन्नता उदाहरणसहित लेख्नुहोस्। [3]
- धातु हिँड्- लाई तीनै कालको सामान्य पक्षमा र भूतकालका चारै पक्षमा राख्नुहोस्। [3]
- पञ्चम वर्ण र शिरबिन्दु कहिले-कहिले लेखिन्छ ? नियम र तीन-तीन उदाहरण लेख्नुहोस्। [3]
- नेपाली शब्दमा ह्रस्व-दीर्घको नियम के हो ? तत्सम शब्दमा त्यो कसरी फरक पर्छ ? [3]
- पदयोग र पदवियोगका नियम उदाहरणसहित लेख्नुहोस्। [3]
उत्तर
२१. कालले कामको समय जनाउँछ — वर्तमान, भूत, भविष्यत्। पक्षले कामको अवस्था जनाउँछ — सामान्य, अपूर्ण, पूर्ण, अभ्यस्त। एउटै क्रियामा दुवै सँगै हुन्छन्: गर्दै थियो मा काल भूत र पक्ष अपूर्ण; गरेको छ मा काल वर्तमान र पक्ष पूर्ण।
२२. सामान्य — वर्तमान: ऊ हिँड्छ; भूत: ऊ हिँड्यो; भविष्यत्: ऊ हिँड्नेछ। भूतकालका चार पक्ष — सामान्य: ऊ हिँड्यो; अपूर्ण: ऊ हिँड्दै थियो; पूर्ण: ऊ हिँडेको थियो; अभ्यस्त: ऊ हिँड्थ्यो।
२३. अनुनासिकपछि वर्गीय व्यञ्जन (क-वर्ग, च-वर्ग, ट-वर्ग, त-वर्ग, प-वर्ग) आएमा त्यसै वर्गको पञ्चम वर्ण लेखिन्छ — अङ्क, चञ्चल, घण्टा, सन्तोष, सम्बन्ध। अनुनासिकपछि अन्तस्थ (य र ल व), ऊष्म (श ष स ह) वा स्वर आएमा शिरबिन्दु लेखिन्छ — संयोग, संरचना, संवाद, संसार, संहार।
२४. नेपाली (तद्भव/आगन्तुक) शब्दको बिचमा ह्रस्व र अन्त्यमा दीर्घ लेखिन्छ — बिहान, बिरामी, चिनी; पानी, चिठी, साथी। तत्सम शब्द भने संस्कृतकै मूल रूपमा लेखिन्छन्, त्यसैले तिनमा बिचमै दीर्घ पनि आउँछ — सूर्य, पूर्व, दीर्घ — र अन्त्यमा ह्रस्व पनि आउँछ — कवि, मुनि, गुरु, वायु।
२५. जोडिने — विभक्ति (रामले, घरमा, उसलाई) र नामयोगी (घरमाथि, रुखमुनि, बाटोभरि) आफ्नो शब्दसँग जोडेर लेखिन्छन्। छुट्टिने — संयुक्त क्रियाका दुई अङ्ग (गर्न सक्छु, पढ्न थाल्यो) र सहायक क्रिया (गर्दै छ, गरेको थियो) छुट्याएर लेखिन्छन्।
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