Unit 20 · व्याकरण · 11 min read
द्वित्व र समास प्रक्रियाद्वारा शब्दनिर्माण
What the syllabus asks for 10
- द्वित्व
- समास
- तत्पुरुष समास
- कर्मधारय समास
- द्विगु समास
- द्वन्द्व समास
- बहुव्रीहि समास
- अव्ययीभाव समास
- समास पहिचानको चार-चरण विधि
- शुद्ध र अशुद्ध — जोडीमा हेर्नुहोस्
अघिल्लो अध्यायमा शब्दको अगाडि-पछाडि शब्दांश जोडेर नयाँ शब्द बनाइयो। यहाँ पूरै शब्दसँग शब्द जोडिन्छ। एउटै शब्द दोहोर्याउँदा द्वित्व बन्छ — घरघर, बिस्तारै-बिस्तारै; दुई फरक शब्द जोडिँदा समास बन्छ — राजकुमार, आमाबुबा, नीलकण्ठ। परीक्षामा शब्दनिर्माणबाट आउने ३ अङ्क मध्ये समास सबैभन्दा नियमित प्रश्न हो, किनभने यसको उत्तर विग्रह गरेर प्रमाणित गर्न सकिन्छ। कक्षा ११ मा समासका नाम चिनाइएका थिए; यहाँ प्रधान पद कुन हो भन्ने एउटै कसोटीबाट छवटै भेद छुट्याउने तरिका सिकिन्छ।
(१) दिइएको समस्त पदको विग्रह गर्न सक्नु — जोडिएको शब्दलाई फुकाएर लेख्नु। (२) विग्रह हेरेर प्रधान पद पहिचान गर्नु। (३) प्रधान पदका आधारमा समासको भेद भन्नु। (४) द्वित्वका चार किसिम उदाहरणसहित छुट्याउनु।
20.1 द्वित्व
एउटै शब्द वा त्यसको मिल्दोजुल्दो रूप दोहोर्याएर नयाँ अर्थ वा जोड दिने शब्दनिर्माण प्रक्रियालाई द्वित्व (द्विरुक्ति) भनिन्छ।
| किसिम | नियम | उदाहरण | के जनाउँछ |
|---|---|---|---|
| पूर्ण द्वित्व | उही शब्द जस्ताको तस्तै दोहोरिन्छ | घरघर, ठुला ठुला, बिस्तारै-बिस्तारै, फेरि-फेरि | बहुलता, निरन्तरता, जोड |
| आंशिक द्वित्व | दोस्रो पदको कुनै वर्ण फेरिन्छ | उल्टोपुल्टो, हल्लाखल्ला, अल्लमगल्लम, ढलपल | अस्तव्यस्तता, समूहभाव |
| अनुकरणात्मक द्वित्व | आवाज वा गतिको नक्कल | झमझम, टुकटुक, सुइँसुइँ, चिरबिर, गडगड | ध्वनि, गति |
| प्रतिध्वन्यात्मक द्वित्व | दोस्रो पद आफैँमा निरर्थक | किताब-सिताब, पानी-सानी, चिया-सिया | "र यस्तै अरू" |
द्वित्वमा दुवै पद उही वा मिल्दोजुल्दो हुन्छन् — घरघर, उल्टोपुल्टो। समासमा दुई फरक अर्थ भएका शब्द जोडिन्छन् — आमाबुबा, राजकुमार। त्यसैले आमाबुबा द्वित्व होइन, द्वन्द्व समास हो; घरघर समास होइन, पूर्ण द्वित्व हो।
20.2 समास
दुई वा दुईभन्दा बढी पद आपसमा मिलेर एउटै पद बन्ने प्रक्रियालाई समास भनिन्छ। बनेको एउटै शब्दलाई समस्त पद र त्यसलाई फुकाएर लेख्ने कामलाई विग्रह भनिन्छ।
| पद | नाम |
|---|---|
| अगाडिको पद | पूर्वपद |
| पछाडिको पद | उत्तरपद |
| जोडिएर बनेको शब्द | समस्त पद |
| फुकाएर लेखेको रूप | विग्रह |
जस्तै — राजकुमार समस्त पद; राजाको कुमार विग्रह; राजा पूर्वपद; कुमार उत्तरपद।
समासका छ भेद — प्रधान पदका आधारमा
20.3 तत्पुरुष समास
उत्तरपद प्रधान भई विग्रहमा पूर्वपदसँग कुनै विभक्ति लाग्ने समासलाई तत्पुरुष समास भनिन्छ।
विभक्तिका आधारमा यसका भेद:
| भेद | विभक्ति | समस्त पद | विग्रह |
|---|---|---|---|
| द्वितीया तत्पुरुष | लाई | स्वर्गप्राप्त | स्वर्गलाई प्राप्त |
| तृतीया तत्पुरुष | ले/द्वारा | रोगपीडित | रोगले पीडित |
| चतुर्थी तत्पुरुष | का लागि | गोशाला | गाईका लागि शाला |
| पञ्चमी तत्पुरुष | बाट/देखि | ऋणमुक्त | ऋणबाट मुक्त |
| षष्ठी तत्पुरुष | को/का/की | राजकुमार | राजाको कुमार |
| सप्तमी तत्पुरुष | मा | गृहप्रवेश | गृहमा प्रवेश |
थप उदाहरण — पापमुक्त (पापबाट मुक्त), गङ्गाजल (गङ्गाको जल), विद्यालय (विद्याको आलय), वनवास (वनमा वास), देशभक्त (देशप्रति भक्त), तुलसीकृत (तुलसीले कृत)।
20.4 कर्मधारय समास
पूर्वपद विशेषण र उत्तरपद विशेष्य भई दुवै पद एउटै कारकमा रहने, उत्तरपद प्रधान भएको समासलाई कर्मधारय समास भनिन्छ।
| समस्त पद | विग्रह |
|---|---|
| महापुरुष | महान् पुरुष |
| नीलकमल | नीलो कमल |
| परमेश्वर | परम ईश्वर |
| महाराज | महान् राजा |
| कालापानी | कालो पानी |
| सज्जन | सत् जन (असल मानिस) |
विग्रहमा पूर्वपदसँग विभक्ति लाग्यो भने तत्पुरुष — राजाको कुमार। पूर्वपद उत्तरपदको विशेषण भयो र विभक्ति लागेन भने कर्मधारय — नीलो कमल। नीलकमल मा "नीलोको कमल" भन्न मिल्दैन, त्यसैले यो कर्मधारय हो। कर्मधारय वास्तवमा तत्पुरुषकै एक उपभेद मानिन्छ, तर परीक्षामा छुट्टै नाम लेख्नुपर्छ।
20.5 द्विगु समास
पूर्वपद सङ्ख्यावाचक भई समूह वा समाहार जनाउने, उत्तरपद प्रधान भएको समासलाई द्विगु समास भनिन्छ।
| समस्त पद | विग्रह |
|---|---|
| चौबाटो | चार बाटोको समूह |
| त्रिभुवन | तीन भुवनको समाहार |
| पञ्चतत्त्व | पाँच तत्त्वको समूह |
| सप्ताह | सात दिनको समूह |
| दशावतार | दश अवतारको समूह |
| नवरत्न | नौ रत्नको समूह |
| तीनतले | तीन तलाको |
20.6 द्वन्द्व समास
दुवै पद प्रधान भई विग्रहमा र, अनि वा वा लाग्ने समासलाई द्वन्द्व समास भनिन्छ।
| समस्त पद | विग्रह |
|---|---|
| आमाबुबा | आमा र बुबा |
| दालभात | दाल र भात |
| नाककान | नाक र कान |
| हातखुट्टा | हात र खुट्टा |
| लोग्नेस्वास्नी | लोग्ने र स्वास्नी |
| राजारानी | राजा र रानी |
| दिनरात | दिन र रात |
| सुखदुःख | सुख र दुःख |
20.7 बहुव्रीहि समास
दुवै पदमध्ये कुनै पनि प्रधान नभई तिनले जनाउने तेस्रो कुनै अर्थ प्रधान हुने समासलाई बहुव्रीहि समास भनिन्छ।
| समस्त पद | विग्रह | कसलाई जनाउँछ |
|---|---|---|
| दशानन | दश आनन भएको | रावण |
| पीताम्बर | पहेँलो अम्बर भएको | कृष्ण |
| चक्रपाणि | चक्र पाणि (हात) मा भएको | विष्णु |
| लम्बोदर | लामो उदर भएको | गणेश |
| नीलकण्ठ | नीलो कण्ठ भएको | शिव |
| चतुर्भुज | चार भुजा भएको | विष्णु |
| पितामह | पिताको पिता | बाजे |
नीलकण्ठ लाई कर्मधारय पनि पढ्न सकिन्छ (नीलो कण्ठ), तर त्यो शिव लाई जनाउँछ भने बहुव्रीहि हो। कसोटी — समस्त पदले पूर्वपद वा उत्तरपद कुनैलाई नजनाई तेस्रै कुरालाई जनायो ? जनायो भने बहुव्रीहि। दशानन ले न "दश" जनाउँछ न "आनन" — रावण जनाउँछ, त्यसैले बहुव्रीहि।
20.8 अव्ययीभाव समास
पूर्वपद अव्यय भई पूरै समस्त पद अव्यय (क्रियायोगी) बन्ने समासलाई अव्ययीभाव समास भनिन्छ। यसमा पूर्वपद प्रधान हुन्छ।
| समस्त पद | विग्रह |
|---|---|
| यथाशक्ति | शक्तिअनुसार |
| यथासमय | समयअनुसार |
| प्रतिदिन | हरेक दिन |
| आजीवन | जीवनभरि |
| आमरण | मृत्युसम्म |
| निर्विघ्न | विघ्नबिना |
| भरपेट | पेटभरि |
20.9 समास पहिचानको चार-चरण विधि
परीक्षामा जुनसुकै समस्त पद आए पनि यही क्रम लगाउनुहोस् — अनुमान गर्नु पर्दैन।
| चरण | प्रश्न | निष्कर्ष |
|---|---|---|
| १ | पूर्वपद अव्यय हो ? (यथा, प्रति, आ, निर्, भर) | हो भने अव्ययीभाव — यहीँ रोकिनुहोस् |
| २ | समस्त पदले तेस्रै कुरा जनायो ? | जनायो भने बहुव्रीहि |
| ३ | विग्रहमा र लाग्यो ? | लाग्यो भने द्वन्द्व |
| ४ | पूर्वपद सङ्ख्या हो ? विशेषण हो ? कि विभक्ति लाग्यो ? | क्रमशः द्विगु, कर्मधारय, तत्पुरुष |
नमुना — आजीवन। चरण १: आ अव्यय हो → अव्ययीभाव, सकियो। नमुना — पीताम्बर। चरण १: पीत अव्यय होइन। चरण २: कृष्णलाई जनायो → बहुव्रीहि। नमुना — नवरत्न। चरण १, २, ३ मा पर्दैन। चरण ४: नव सङ्ख्या हो → द्विगु।
उत्तरमा सधैँ विग्रह लेख्नुहोस्
"समासको भेद लेख्नुहोस्" भन्ने प्रश्नमा भेदको नाम मात्र लेख्दा पूरा अङ्क आउँदैन। विग्रह + भेद + कारण — तीनै लेख्नुहोस्। जस्तै: ऋणमुक्त = ऋणबाट मुक्त (विग्रह), पञ्चमी तत्पुरुष (भेद), किनभने पूर्वपदसँग बाट विभक्ति लाग्यो (कारण)।
20.10 शुद्ध र अशुद्ध — जोडीमा हेर्नुहोस्
| × अशुद्ध | ✓ शुद्ध | किन |
|---|---|---|
| घरघर — समास | घरघर — पूर्ण द्वित्व | दुवै पद उही |
| आमाबुबा — द्वित्व | आमाबुबा — द्वन्द्व समास | दुई फरक शब्द |
| राजकुमार — द्वन्द्व | राजकुमार — षष्ठी तत्पुरुष | विग्रह "राजाको कुमार" |
| नीलकमल — तत्पुरुष | नीलकमल — कर्मधारय | पूर्वपद विशेषण, विभक्ति छैन |
| दशानन — कर्मधारय | दशानन — बहुव्रीहि | तेस्रो कुरा (रावण) जनायो |
| चौबाटो — तत्पुरुष | चौबाटो — द्विगु | पूर्वपद सङ्ख्यावाचक |
| यथाशक्ति — तत्पुरुष | यथाशक्ति — अव्ययीभाव | पूर्वपद अव्यय |
| दालभात — तत्पुरुष | दालभात — द्वन्द्व | विग्रहमा र लाग्छ |
| पीताम्बर — कर्मधारय | पीताम्बर — बहुव्रीहि | कृष्ण जनायो |
| ऋणमुक्त — षष्ठी | ऋणमुक्त — पञ्चमी तत्पुरुष | विग्रह "ऋणबाट मुक्त" |
| गृहप्रवेश — षष्ठी | गृहप्रवेश — सप्तमी तत्पुरुष | विग्रह "गृहमा प्रवेश" |
| रोगपीडित — द्वितीया | रोगपीडित — तृतीया तत्पुरुष | विग्रह "रोगले पीडित" |
| विग्रह: राजकुमार = राजा र कुमार | राजाको कुमार | द्वन्द्व होइन |
| विग्रह: आमाबुबा = आमाको बुबा | आमा र बुबा | तत्पुरुष होइन |
| विग्रह: लम्बोदर = लामो उदर (मात्र) | लामो उदर भएको — गणेश | बहुव्रीहिमा तेस्रो अर्थ चाहिन्छ |
| उल्टोपुल्टो — प्रतिध्वन्यात्मक | उल्टोपुल्टो — आंशिक द्वित्व | पुल्टो ले अर्थ बोक्छ |
| किताब-सिताब — आंशिक | किताब-सिताब — प्रतिध्वन्यात्मक | सिताब निरर्थक |
| झमझम — पूर्ण द्वित्व | झमझम — अनुकरणात्मक | आवाजको नक्कल |
| समस्त पद र विग्रह एउटै | जोडिएको रूप समस्त पद, फुकाएको विग्रह | परिभाषा |
| प्रतिदिन — द्विगु | प्रतिदिन — अव्ययीभाव | प्रति अव्यय हो |
| सप्ताह — द्वन्द्व | सप्ताह — द्विगु | पूर्वपद सप्त सङ्ख्यावाचक |
| पितामह — तत्पुरुष | पितामह — बहुव्रीहि | बाजेलाई जनायो |
| महापुरुष — द्विगु | महापुरुष — कर्मधारय | महा सङ्ख्या होइन, विशेषण |
| निर्विघ्न — तत्पुरुष | निर्विघ्न — अव्ययीभाव | पूरै पद अव्यय बन्यो |
| सुखदुःख — कर्मधारय | सुखदुःख — द्वन्द्व | दुवै पद प्रधान |
| नीलकण्ठ — सधैँ कर्मधारय | शिव जनाए बहुव्रीहि | सन्दर्भले भेद तय गर्छ |
| त्रिभुवन — कर्मधारय | त्रिभुवन — द्विगु | त्रि सङ्ख्यावाचक |
| भरपेट — तत्पुरुष | भरपेट — अव्ययीभाव | भर- अव्यय, पूरै पद अव्यय |
प्रश्न. "चक्रपाणि" को विग्रह गरी समासको भेद कारणसहित लेख्नुहोस्।
समाधान. १. विग्रह — चक्र पाणि (हात) मा भएको। २. यसले "चक्र" पनि जनाउँदैन, "पाणि" पनि जनाउँदैन। ३. यसले विष्णु भन्ने तेस्रै कुरा जनायो। ४. तेस्रो अर्थ प्रधान भएकाले यो बहुव्रीहि समास हो।
उत्तर. बहुव्रीहि समास — चक्र हातमा भएका, अर्थात् विष्णु।
प्रश्न. "नीलकमल" र "नीलकण्ठ" — दुवैमा नील छ; भेद उही हो कि फरक ?
समाधान. १. नीलकमल = नीलो कमल। यसले साँच्चै कमल नै जनाउँछ → उत्तरपद प्रधान → कर्मधारय समास। २. नीलकण्ठ = नीलो कण्ठ भएको। यसले कण्ठ जनाउँदैन, शिव जनाउँछ → तेस्रो अर्थ प्रधान → बहुव्रीहि समास।
उत्तर. भेद फरक — पहिलो कर्मधारय, दोस्रो बहुव्रीहि। पूर्वपद उही भए पनि समस्त पदले कसलाई जनायो भन्ने कुराले भेद तय गर्छ।
प्रश्न. "हल्लाखल्ला", "हातखुट्टा", "टुकटुक" — यी तीनलाई छुट्याई किसिम लेख्नुहोस्।
समाधान. १. हल्लाखल्ला — खल्ला आफैँमा अर्थपूर्ण शब्द होइन, हल्ला कै फेरिएको रूप हो → आंशिक द्वित्व। २. हातखुट्टा — हात र खुट्टा दुवै फरक अर्थ भएका शब्द हुन्, विग्रहमा र लाग्छ → द्वन्द्व समास। ३. टुकटुक — आवाजको नक्कल हो → अनुकरणात्मक द्वित्व।
पाठको सार
- द्वित्व = उही वा मिल्दोजुल्दो शब्द दोहोर्याउनु। चार किसिम — पूर्ण (घरघर), आंशिक (उल्टोपुल्टो), अनुकरणात्मक (झमझम), प्रतिध्वन्यात्मक (किताब-सिताब)।
- समास = दुई फरक पद जोडिएर एउटै पद बन्नु। जोडिएको रूप समस्त पद, फुकाएको विग्रह।
- भेद तय गर्ने एउटै कसोटी — विग्रह गरेपछि कुन पद प्रधान ?
- उत्तरपद प्रधान — तत्पुरुष (विभक्ति लाग्छ: राजकुमार), कर्मधारय (पूर्वपद विशेषण: नीलकमल), द्विगु (पूर्वपद सङ्ख्या: चौबाटो)।
- दुवै पद प्रधान — द्वन्द्व (विग्रहमा र: आमाबुबा)।
- अन्य पद प्रधान — बहुव्रीहि (तेस्रो कुरा जनाउँछ: दशानन = रावण)।
- पूर्वपद प्रधान — अव्ययीभाव (पूर्वपद अव्यय, पूरै पद अव्यय बन्छ: यथाशक्ति)।
- पहिचानको क्रम — अव्यय ? तेस्रो अर्थ ? र ? अनि सङ्ख्या/विशेषण/विभक्ति — यही चार चरणले सबै भेद छुट्याउँछ।
- तत्पुरुषका छ उपभेद विभक्तिका आधारमा — द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पञ्चमी, षष्ठी, सप्तमी।
अभ्यास
विग्रह गरी समासको भेद लेख्नुहोस् (१ अङ्क)
- राजकुमार [1]
- आमाबुबा [1]
- चौबाटो [1]
- दशानन [1]
- यथाशक्ति [1]
उत्तर
१. राजाको कुमार — षष्ठी तत्पुरुष (विभक्ति को)।
२. आमा र बुबा — द्वन्द्व समास (दुवै पद प्रधान)।
३. चार बाटोको समूह — द्विगु समास (पूर्वपद सङ्ख्यावाचक)।
४. दश आनन भएको — रावण — बहुव्रीहि समास (तेस्रो अर्थ प्रधान)।
५. शक्तिअनुसार — अव्ययीभाव समास (पूर्वपद अव्यय)।
तत्पुरुषको उपभेद लेख्नुहोस् (१ अङ्क)
- ऋणमुक्त [1]
- गृहप्रवेश [1]
- रोगपीडित [1]
- गङ्गाजल [1]
- स्वर्गप्राप्त [1]
उत्तर
६. ऋणबाट मुक्त — पञ्चमी तत्पुरुष।
७. गृहमा प्रवेश — सप्तमी तत्पुरुष।
८. रोगले पीडित — तृतीया तत्पुरुष।
९. गङ्गाको जल — षष्ठी तत्पुरुष।
१०. स्वर्गलाई प्राप्त — द्वितीया तत्पुरुष।
द्वित्वको किसिम लेख्नुहोस् (१ अङ्क)
- बिस्तारै-बिस्तारै [1]
- उल्टोपुल्टो [1]
- चिरबिर [1]
- पानी-सानी [1]
- ठुला ठुला [1]
उत्तर
११. पूर्ण द्वित्व — उही शब्द जस्ताको तस्तै दोहोरियो।
१२. आंशिक द्वित्व — दोस्रो पदमा वर्ण फेरियो।
१३. अनुकरणात्मक द्वित्व — चराको आवाजको नक्कल।
१४. प्रतिध्वन्यात्मक द्वित्व — सानी आफैँमा निरर्थक।
१५. पूर्ण द्वित्व — बहुलता जनायो।
समास कि द्वित्व — छुट्याउनुहोस् (१ अङ्क)
- हातखुट्टा [1]
- हल्लाखल्ला [1]
- सुखदुःख [1]
- झमझम [1]
- लोग्नेस्वास्नी [1]
उत्तर
१६. द्वन्द्व समास — हात र खुट्टा, दुवै पद अर्थपूर्ण।
१७. आंशिक द्वित्व — खल्ला स्वतन्त्र शब्द होइन।
१८. द्वन्द्व समास — सुख र दुःख।
१९. अनुकरणात्मक द्वित्व — पानी पर्ने आवाजको नक्कल।
२०. द्वन्द्व समास — लोग्ने र स्वास्नी।
छोटो उत्तर दिनुहोस् (३ अङ्क)
- द्वित्वका चार किसिम उदाहरणसहित लेख्नुहोस्। [3]
- समासका छ भेद प्रधान पदका आधारमा उदाहरणसहित छुट्याउनुहोस्। [3]
- तत्पुरुष र कर्मधारय समास कसरी छुट्याउने ? कसोटी र दुई-दुई उदाहरण लेख्नुहोस्। [3]
- बहुव्रीहि समासको पहिचान कसरी गर्ने ? तीन उदाहरणसहित लेख्नुहोस्। [3]
- तत्पुरुष समासका छ उपभेद विग्रहसहित लेख्नुहोस्। [3]
उत्तर
२१. पूर्ण द्वित्व — उही शब्द जस्ताको तस्तै: घरघर, ठुला ठुला। आंशिक द्वित्व — दोस्रो पदमा वर्ण फेरिन्छ: उल्टोपुल्टो, हल्लाखल्ला। अनुकरणात्मक द्वित्व — आवाज/गतिको नक्कल: झमझम, टुकटुक। प्रतिध्वन्यात्मक द्वित्व — दोस्रो पद निरर्थक: किताब-सिताब, पानी-सानी।
२२. उत्तरपद प्रधान — तत्पुरुष (राजकुमार), कर्मधारय (नीलकमल), द्विगु (चौबाटो)। दुवै पद प्रधान — द्वन्द्व (आमाबुबा)। अन्य पद प्रधान — बहुव्रीहि (दशानन = रावण)। पूर्वपद प्रधान — अव्ययीभाव (यथाशक्ति)।
२३. कसोटी — विग्रहमा पूर्वपदसँग विभक्ति लाग्यो कि लागेन ? लाग्यो भने तत्पुरुष: राजकुमार = राजाको कुमार; गृहप्रवेश = गृहमा प्रवेश। नलागी पूर्वपद उत्तरपदको विशेषण भयो भने कर्मधारय: नीलकमल = नीलो कमल; महापुरुष = महान् पुरुष। नीलकमल लाई "नीलोको कमल" भन्न मिल्दैन, त्यसैले त्यो तत्पुरुष होइन।
२४. कसोटी — समस्त पदले पूर्वपद वा उत्तरपद कुनैलाई नजनाई तेस्रै कुरालाई जनायो भने त्यो बहुव्रीहि हो। उदाहरण — दशानन (दश आनन भएको = रावण), पीताम्बर (पहेँलो अम्बर भएको = कृष्ण), लम्बोदर (लामो उदर भएको = गणेश)। यीमध्ये कुनैले पनि "आनन", "अम्बर" वा "उदर" जनाउँदैन।
२५. द्वितीया — स्वर्गप्राप्त = स्वर्गलाई प्राप्त। तृतीया — रोगपीडित = रोगले पीडित। चतुर्थी — गोशाला = गाईका लागि शाला। पञ्चमी — ऋणमुक्त = ऋणबाट मुक्त। षष्ठी — राजकुमार = राजाको कुमार। सप्तमी — गृहप्रवेश = गृहमा प्रवेश।
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